सरधना • मेरठ
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टीम भराला
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परिचय
विनीत भराला एक किसान परिवार के बेटे हैं। भराला गाँव की जिस मिट्टी में पीढ़ियों से उनके पुरखों ने पसीना बहाया, उसी माटी की गोद में वे पले-बढ़े। खेत-खलिहान, हल और फसल ही उनका बचपन रहे — किसान का संघर्ष और मेहनतकश मजदूर का दर्द उन्होंने किताबों में नहीं, अपनी आँखों से जिया है।
लगभग पाँच दशक पहले उनके पिता स्वर्गीय सत्यप्रकाश भराला जी ने एक संकल्प लिया था — हर किसान, हर मजदूर और हर गरीब की निःस्वार्थ सेवा। न कोई स्वार्थ, न कोई दिखावा — बस लोगों के दुख-दर्द में सच्चा साथी बनकर खड़े रहना। पिता ने अपना पूरा जीवन इसी सेवा को सौंप दिया, और आज वही संकल्प विनीत के खून में बहता है।
जहाँ कोई किसान अपनी फसल के लिए परेशान है, जहाँ कोई मजदूर दो वक़्त की रोटी के लिए जूझ रहा है, जहाँ कोई गरीब उम्मीद भरी नज़रों से देखता है — विनीत वहाँ सबसे पहले पहुँचते हैं। पिता से पुत्र तक, यह भरोसे, त्याग और सेवा की एक अटूट परंपरा है।
“जिस मिट्टी ने पाला और जिस किसान-मजदूर ने सींचा — उन्हीं की सेवा ही मेरा सबसे बड़ा धर्म है।”
— विनीत भराला
सेवा की यात्रा
पिता स्वर्गीय सत्यप्रकाश भराला जी ने भराला गाँव से समाज सेवा का बीड़ा उठाया — किसान और मजदूर परिवारों की आवाज़ बनकर, उनके सुख-दुख में अडिग खड़े रहे।
पाँच दशकों तक किसानों के हक, पानी, सड़क और सम्मान की लड़ाई — यह परिवार हर मुश्किल में सरधना की जनता के साथ खड़ा रहा, बिना रुके, बिना थके।
पिता की सेवा-परंपरा को बेटे विनीत भराला ने आगे बढ़ाया — वही समर्पण, वही जमीनी जुड़ाव, और नई पीढ़ी की नई ऊर्जा के साथ।
आज विनीत भराला गाँव-गाँव सक्रिय हैं — किसान पंचायत और किसान-मजदूर स्वाभिमान पंचायत में हज़ारों की आवाज़, और हर समुदाय को जोड़ने वाले सर्वधर्म सद्भाव के साझा आयोजन। सेवा का यह सफ़र निरंतर जारी है।